Arya Samaj Havan Rituals During Griha Pravesh
Purifying the Home with Sacred Fire & Vedic Mantras
The Havan (Yajna) is the heart of the Griha Pravesh ceremony. In Arya Samaj tradition, the fire is considered the purest medium to connect with the Almighty. Every offering made into the fire, accompanied by Vedic chants, is believed to reach directly to the divine powers.
Here’s how Arya Samaj Pandit Ji typically performs the Havan during Griha Pravesh:
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Ganesh Vandana & Invocation of Agni – The ritual begins with prayers to Lord Ganesh and Agni, seeking removal of obstacles and invoking divine blessings.
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Sankalp (Resolution) – The head of the family takes a vow for peace and prosperity of the household while offering sacred water.
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Purification Mantras – Vedic mantras are chanted to purify the environment and cleanse every corner of the new home.
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Offerings in Fire (Ahuti) – Ghee, grains, and medicinal herbs are offered into the fire. Each offering is accompanied by chanting, which carries the family’s prayers to higher energies.
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Participation of Family Members – Every member is encouraged to offer ahuti, symbolizing unity and shared responsibility.
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Prayers for Prosperity & Health – Special mantras are recited to seek blessings for wealth, growth, harmony, and protection from illnesses.
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Shanti Path & Aashirwad – The ceremony concludes with universal prayers for peace (Shanti Path) and blessings for all beings.
Sacrificial method :
यज्ञ वेदी में विराजमान समस्त जन आचमन अङ्गस्पर्श करके ईश्वरस्तुति- प्रार्थनोपासना के मन्त्रों के अर्थसहित श्रद्धा पूर्वक पाठ और स्वस्तिवचन, शांति करण उच्चारण और अग्निधान करके विशेष यज्ञ की विधि द्वारा पूर्णाहुति से पूर्व निम्नलिखित मंत्रों से विशेष आहुति दिलावें और अर्थ भी सुनाते जावें।
ओम् विश्वानि देव सवितुर्दुरितानि परसुव। यद् भद्रन्त आ सुव ॥ यजु.
अर्थ-
हे सकल जगत् के उत्पत्तिकर्ता, समग्र ऐश्वर्ययु शुद्ध स्वरूप, सब सुखों के दाता परमेश्वर आप कृपा कर हमारे सम्पूर्ण दुर्गुण-दुर्व्यसन और दुःखों को दूर कर दीजिये। और जो कल्याणकारक गुण-कर्म-स्वभाव और पदार्थ हैं वह सब हमको प्राप्त कीजिये ।
ओम् प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो विश्वा जातानि परिता बभुव। यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नो अस्तु वयं स्याम पतयो रयिणाम्॥ ऋ.
अर्थ-
हे सब प्रजा के स्वामी परमात्मा आपसे भिन्न दूसरा कोई उन इन सब उत्पन्न हुए जड़-चेतनादिकों को नहीं तिरस्कार करता है, अर्थात् आप सर्वोपरि हैं। जिस-जिस पदार्थ की कामनावाले हम लोग भक्ति करें आपका आश्रय लेवें और वाञ्छा करें, उस-उस की कामना हमारी सिद्ध होवे,
जिससे हम लोग धनैश्वयों के स्वामी होवें।
ओम् ऊर्जस्वति पयस्वति पृथिव्यां निमिता मिता। विश्वान्नं बिभ्रति शैलो मा हिंसाःप्रतिगृह्णत:॥ अथर्व.
अर्थ :
हे शाले ! तू आरोग्य, योजना से युक्त एवं धन-धान्य से संकलित दुग्ध, जल आदि से युक्त पृथ्वी पर योजना के अनुसार माप-माप कर बनायी जा रही है। इस प्रकार के अन्नों को धारण करता हुई तू ग्रहण करनेहारों को सदा सुखाद हो।
अब निम्नलिखित तीनों मन्त्रों के उच्चारण के साथ निश्चित स्थान पर तीन बार जल छिड़के-
ओ3म् आपो हिष्ठा मयोभुवस्ता नऽ ऊर्जे दधातन।
महे रणाय चक्षसे ॥
यजुः 36।14।।
ओम् यो वः शिवतमो रसस्तस्य भजायतेह नः। उशतीरिव
मातरः ।। यजुः0 36.16.।
ओम् तस्मा अरंऽगमाम् वो यस्य क्षयाय जिन्वथ। आपो जनयथा च नः ॥
तत्पश्चात निम्न मंत्र बोलकर शिलान्यास अथवा नींव रखावें
ओम् अग्न आ याहि वीतये गुणानो हव्यदातये। नि होता सत्सि बर्हिषि ।। साम0 1.1.
अर्थ :
हे सर्व जगत् के निर्माण करनेवाले जगदीश्वर! आप कृपा करके हमारे यज्ञ में अर्थात् ज्ञान-यज्ञरूप ध्यान में आइये, पधारिये । इस यज्ञ में आप ही की स्तुति हो रही है। हमारे एक-मात्र पूज्य और इष्ट आप ही हैं। सब पदाथों और सब शक्तियों के दाता परमेश्वर हमारे हृदय को सुप्रकाशित कीजिये जिससे शुद्ध-बुद्धि और शुभ-विचारों का उदय हो ताकि आपकी कृपा से हे ज्योतिस्वरूप ! हम सदैव यज्ञ-कर्मो का अनुष्ठान करनेवाले हों और सफलता प्राप्त करते रहें। हे स्वामिन्। आइये और हमारे हृदय में विराजिये,
फिर यज्ञ-मण्डप में बैठकर गायत्री मन्त्र के उच्चस्वर सहित पाठ से तीन आहुतियाँ देकर सर्वं वै पूर्णं स्वाहा ३ बार उच्चारण करके पूर्णाहुति दिलावें ।
ईशभजन-प्रार्थना-मंगल के पश्चात्
ओम् सत्य सन्तु यजमानस्य कामः।
ओम् स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ओम् स्वस्ति।
ओम् स्वस्ति।
ओम् स्वस्ति॥
के मन्त्रपाठ-सहित यजमानों पर पुष्प वर्षा करके आशीर्वाद दें,
One unique feature of Arya Samaj rituals is that they are transparent, simple, and deeply meaningful. There is no place for blind belief or unnecessary complexity. The focus is always on knowledge, truth, and universal well-being.
Interestingly, modern science also supports the practice of Havan. Studies show that the smoke created by ghee, neem, and other natural herbs during Havan purifies the air, kills bacteria, and creates a healthier environment. Thus, this ritual not only blesses your home spiritually but also makes it naturally refreshing and healthy to live in.