Ritual Process of Arya Samaj Birthday Havan
Step-by-Step Guide to a Spiritual Birthday Celebration
The Arya Samaj Birthday Pooja Havan follows a simple yet powerful process guided by ancient Vedic practices. Unlike complicated rituals, Arya Samaj keeps the ceremony pure, meaningful, and easy for everyone to participate in. Below are the common steps followed during the havan:
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Sankalp (Resolution): The ceremony begins with the birthday person and family members taking a pledge with pure intentions, seeking blessings for good health, wisdom, and prosperity.
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Ganesh & Saraswati Vandana: Prayers are offered for knowledge, success, and the removal of obstacles.
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Gayatri Mantra Chanting: This universal mantra is recited to invoke divine light and inner strength.
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Agni Sthapana (Sacred Fire Setup): The holy fire is lit in the Havan Kund, symbolizing purity, energy, and divine power.
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Havan Mantras & Ahuti: Vedic mantras are chanted while ghee, samagri, and grains are offered into the fire, carrying prayers to the divine.
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Blessings & Ashirwad: After the havan, the Pandit ji blesses the birthday person, and all present family members receive sacred ash (vibhuti) and prasad.
The entire ritual usually takes 60 to 90 minutes, making it convenient for families to perform at home, temples, or community halls.
This birthday pooja havan is not limited to age. Parents perform it for children to bless them with health, intelligence, and a bright future. Adults choose it for longevity, inner peace, and prosperity in career and family life.
By performing Arya Samaj Birthday Havan, the day becomes not just a celebration of age but a renewal of life’s purpose with divine energy.
sacrificial method :
जिस दिन जन्म दिवस हो प्रसन्नता पूर्वक अपने माता-पिता एवं अन्य बड़े जनों के साथ मिलकर आचार्य के साथ ईश्वर स्तुति-प्रार्थना उपासना की यज्ञविधि एवं स्वस्तिवाचन व शंतिकरण के मन्त्र स्वर सहित बोलें और दैनिक यज्ञ के साथ निम्न मन्त्रों की आहुतियाँ दें|
जीवेम शरदः शतम् - हम सौ सालों तक जीयें।
बुध्येम शरदः शतम् - हम सौ वर्षों तक बुद्धिमान बने रहें।
रोहेम शरदः शतम्- हम सौ वर्षों तक पुष्ट रहें।
भवेम शरदः शतम् - सौ वर्षों तक बने रहें।
भूयेम शरदः शतम् - सौ वर्षों तक पवित्र बने रहें।
भूयसीः शरदः शतात् - सौ वर्षों तक ऐसी कल्याणकारी बातें होती रहें।
ओ३म् इंद्र जीव सूर्य जीव देवा जीवा जीव्यासमहम्|
सर्वमायुर्जीव्यासम्||
~अथर्ववेद-19.70.1
भावार्थ - हे परम ऐश्वर्यवान देव!! आप हमें श्रेष्ठ जीवन दो| हे सूर्य! हे देवगण! आपकी अनुकूलतापूर्वक मैं दीर्घजीवी होऊं|
ओ३म् आयुषायुः कृतां जीवायुष्मान जीव मा मृथाः|
प्राणेनात्मन्वतां जीव मा मृत्योरुदगा वशम् ||
~अथर्ववेद-19.27.8
ओ३म् शतं जीव शरदो वर्धमानः शतं हेमन्तान्छतमु वसन्तान|
शतमिन्द्राग्नी सविता बृहस्पतिः शतायुषा हविषेमं पुनर्दुः||
~ऋग्वेद -10.161.4
भावार्थ- हे ! मनुष्य तू श्रेष्ठ कर्म व संयम धारण करके सौ वर्षों तक जीने का प्रयास कर | विद्युत, अग्नि, सूर्य, बृहस्पति आदि से समुचित सहयोग लेकर सौ वर्ष तक जीवनधारण कर,
ओ३म् सत्यामाशिषं कृणुता वयोधै कीरिं चिद्ध्यवथ सवेभिरेवैः|
पश्चा मृधो अप भवन्तु विश्वास्तद रोदसी शृणुतं विश्वमिन्वे||
~अथर्ववेद-20.91.11
भावार्थ - हे विद्वानों..!! आपका ‘आयुष्मान भवः’ का आशीर्वाद सत्य हो! आपके मार्ग का अनुसरण करने वाले की रक्षा आप ज्ञान देकर करते हो| आपके मार्गदर्शन में चलने वालों के सब दोष नष्ट हो जाते हैं| इसलिए हे श्रेष्ठ स्त्री-पुरुषों!! आप हमें वेदोक्त शिक्षा दो|
ओं जीवास्थ जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम ||1||
ओं उपजीवा स्थोप जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम ||2||
ओं सं जीवा स्थ सं जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम ||3||
ओं जीवला स्थ जीव्यासं सर्वमायुर्जीव्यासम ||4||
~अथर्ववेद-19.69.1-4
इसके बाद यज्ञ-प्रार्थना व शांतिपाठ के बाद सभी वरिष्ठ जन पुष्प वर्षा के संग निम्न शब्दों से आशीर्वाद दें……
त्वं जीव शरदः शतं वर्धमानः| आयुष्मान तेजस्वी वर्चस्वी श्रीमान् भूयाः ||